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- Sep 19
Example 1: अपने ही मोहल्ले में Departmental Store खोलने वाला व्यक्ति
मान लीजिए किसी व्यक्ति ने कई वर्षों की मेहनत, बचत और planning के बाद अपने ही मोहल्ले में एक Departmental Store शुरू किया। उसे स्वाभाविक रूप से उम्मीद होती है कि मोहल्ले के लोग, पुराने परिचित, रिश्तेदार और परिवार से जुड़े लोग उसकी दुकान को support करेंगे। उसके मन में यह विचार होता है कि “लोग मुझे जानते हैं, मेरे साथ उनके पुराने संबंध हैं, इसलिए रोजमर्रा का सामान खरीदने के लिए वे मेरी दुकान पर ही आएंगे।” शुरुआत में उसे लगता है कि परिचय और रिश्तेदारी उसके business की सबसे बड़ी strength होगी। लेकिन कुछ समय बाद उसे एक अलग reality दिखाई देती है। दुकान पर अपेक्षा से कम ग्राहक आने लगते हैं और जिन लोगों से वह वर्षों से परिचित है, उनमें से कई लोग दूसरी दुकानों से सामान खरीदते रहते हैं।
ऐसी स्थिति के पीछे हमेशा quality, price या service की समस्या ही हो, यह जरूरी नहीं है। कुछ मामलों में social psychology भी भूमिका निभा सकती है। किसी परिचित व्यक्ति को अचानक financially successful होते देख कुछ लोगों के मन में अनजाने में social comparison पैदा हो सकता है। वे सोच सकते हैं “अगर हम लगातार इसी की दुकान से सामान खरीदेंगे तो इसका business बहुत बढ़ जाएगा”, “यह हमसे ज्यादा पैसा कमाने लगेगा”, या “कल को यह हमसे ज्यादा संपन्न और प्रभावशाली हो जाएगा।” ऐसी सोच हमेशा consciously स्वीकार नहीं की जाती, लेकिन व्यक्ति के व्यवहार को प्रभावित कर सकती है। परिणाम यह हो सकता है कि जिस व्यक्ति को अपने सबसे करीबी लोगों से सबसे ज्यादा support की उम्मीद थी, वही व्यक्ति देखता है कि उसके परिचित ग्राहक भी दूसरी दुकानों का चुनाव कर रहे हैं।
यहां Tall Poppy Syndrome का एक संभावित social dimension समझ में आता है किसी परिचित व्यक्ति को अपने ही social circle से ऊपर उठते हुए देखना कुछ लोगों के लिए psychological discomfort पैदा कर सकता है। उन्हें यह महसूस हो सकता है कि “वह अब हमसे आगे निकल रहा है।” ऐसी स्थिति में दूसरे की सफलता को support करने के बजाय उससे दूरी बनाना, उसके business को कम महत्व देना या उसकी उपलब्धि को छोटा करके देखना शुरू हो सकता है। हालांकि यह भी महत्वपूर्ण है कि हर customer का दूसरी दुकान से खरीदारी करना Tall Poppy Syndrome नहीं है। Price, product variety, location, credit facility, quality, habit और customer service जैसे practical factors भी बहुत महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसलिए इस example का उद्देश्य यह दिखाना है कि कभी-कभी social comparison business decisions के पीछे एक subtle psychological factor हो सकता है।
इस उदाहरण का सबसे interesting पहलू यह है कि व्यक्ति को सबसे ज्यादा disappointment बाहर के competitors से नहीं, बल्कि अपने परिचित social circle से हो सकता है। उसने शायद सोचा था कि “अपने लोग मेरा business खड़ा करने में मदद करेंगे”, लेकिन यदि कुछ लोग केवल इसलिए support नहीं करते कि उसकी financial position उनसे बेहतर न हो जाए, तो यह success के प्रति एक unhealthy social reaction हो सकता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति के लिए जरूरी है कि वह हर customer के decision को व्यक्तिगत rejection न समझे, बल्कि अपने business की quality, pricing, service और customer experience पर focus करे। आखिरकार व्यापार रिश्तों की भावनाओं के साथ-साथ value, trust और service पर भी चलता है।
Example 2: चुनाव में अपने ही परिचित या रिश्तेदार का उम्मीदवार बन जाना
एक दूसरा उदाहरण सामाजिक और राजनीतिक जीवन से लिया जा सकता है। मान लीजिए किसी व्यक्ति को पहली बार किसी चुनाव में एक राजनीतिक दल से टिकट मिलता है। उसके परिवार, रिश्तेदारों और मोहल्ले के लोगों को उम्मीद होती है कि उसके परिचित लोग उसका समर्थन करेंगे। उम्मीदवार भी स्वाभाविक रूप से सोच सकता है कि “मैं वर्षों से इन लोगों के बीच रहा हूं, ये मुझे जानते हैं, इसलिए मेरे अपने लोग मेरे साथ खड़े होंगे।” लेकिन चुनाव के दौरान कभी-कभी ऐसी स्थिति भी सामने आ सकती है जब कुछ परिचित या रिश्तेदार उसका समर्थन नहीं करते, बल्कि किसी दूसरे उम्मीदवार को prefer करते हैं।
इसके पीछे कई practical और political reasons हो सकते हैं , व्यक्तिगत पसंद, स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवार की छवि, पार्टी की नीतियां, पुराने राजनीतिक संबंध, जातीय या सामाजिक समीकरण, स्थानीय संगठनात्मक dynamics या किसी अन्य उम्मीदवार के साथ लंबे समय से जुड़ाव। लेकिन कुछ hypothetical situations में personal social comparison भी भूमिका निभा सकता है। किसी व्यक्ति के मन में यह भावना हो सकती है कि “अगर यह चुनाव जीत गया तो इसकी social position बहुत बढ़ जाएगी”, “कल को इसका influence हमसे ज्यादा हो जाएगा” या “परिवार और समाज में इसका महत्व हमसे बहुत ऊपर चला जाएगा।” यदि इसी तरह की सोच समर्थन को प्रभावित करती है, तो यह Tall Poppy-type behaviour के एक संभावित उदाहरण के रूप में समझी जा सकती है।
यह स्थिति खास तौर पर तब psychologically interesting हो जाती है जब व्यक्ति किसी outsider की बजाय अपने ही परिचित व्यक्ति की सफलता से uncomfortable हो। दूसरे क्षेत्र या दूसरे शहर का कोई व्यक्ति सफल हो जाए तो हमें उससे उतनी तुलना महसूस नहीं होती, लेकिन जब हमारे आसपास का कोई व्यक्ति अचानक बहुत ऊपर पहुंचता है, तो social comparison अधिक personal हो सकता है। वह व्यक्ति पहले हमारे साथ बैठता था, हमारे बराबर social circle में था और अब उसके पास political position, authority और influence आ गया है। यही बदलाव कुछ लोगों के लिए psychological discomfort का कारण बन सकता है।
हालांकि चुनाव के संदर्भ में इस concept को लागू करते समय विशेष सावधानी जरूरी है। किसी रिश्तेदार द्वारा किसी उम्मीदवार को वोट न देना अपने-आप में Tall Poppy Syndrome का प्रमाण नहीं है। लोकतांत्रिक चुनाव में प्रत्येक मतदाता को अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट देने का अधिकार है और उसके निर्णय के पीछे अनेक legitimate कारण हो सकते हैं। इसलिए केवल रिश्तेदारी या परिचय के आधार पर यह मान लेना कि विरोध का कारण jealousy है, उचित नहीं होगा। Tall Poppy Syndrome का उदाहरण तभी relevant होगा जब पर्याप्त behavioural context यह दिखाए कि व्यक्ति का primary motivation दूसरे परिचित व्यक्ति की सफलता या सामाजिक उन्नति को रोकना है।
दोनों उदाहरणों में समान Psychological Pattern क्या है?
Departmental Store वाले उदाहरण और चुनाव वाले उदाहरण में परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन hypothetical psychological pattern समान हो सकता है। दोनों में एक परिचित व्यक्ति अपने social circle से ऊपर उठने की कोशिश करता है। पहले मामले में वह economic success हासिल करने की कोशिश कर रहा है और दूसरे में social or political position हासिल करने की। यदि उसके आसपास के कुछ लोग उसकी सफलता को अपनी तुलना में देखते हैं और यह महसूस करते हैं कि “अगर यह आगे बढ़ गया तो हम पीछे रह जाएंगे”, तो social comparison और status threat जैसी psychological processes सक्रिय हो सकती हैं।
यहीं Tall Poppy Syndrome की मूल अवधारणा दिखाई देती है समस्या हमेशा यह नहीं होती कि सामने वाला व्यक्ति क्या कर रहा है; कभी-कभी समस्या यह होती है कि उसकी सफलता हमें अपने बारे में क्या महसूस कराती है। यदि उसकी सफलता हमें प्रेरित करती है तो comparison growth का माध्यम बन सकता है। लेकिन यदि वही सफलता हमें insecure बनाकर उसे रोकने की इच्छा पैदा करती है, तो social comparison unhealthy direction ले सकता है।
सबसे बड़ा सवाल: क्या हम दूसरे की सफलता को अपनी हार समझते हैं?
इन दोनों examples से एक गहरा सामाजिक प्रश्न सामने आता है क्या किसी परिचित व्यक्ति का आगे बढ़ना वास्तव में हमारी हार है? यदि मोहल्ले का कोई व्यक्ति successful entrepreneur बनता है, तो इससे बाकी लोगों की आर्थिक क्षमता समाप्त नहीं हो जाती। यदि परिवार का कोई सदस्य public life में आगे बढ़ता है, तो इससे बाकी परिवार के सदस्यों की सामाजिक पहचान कम नहीं हो जाती। किसी दूसरे की उपलब्धि को अपनी असफलता मानना ही वह psychological trap है जिससे jealousy, resentment और unhealthy competition जन्म ले सकते हैं।
एक mature social environment में सोच यह होनी चाहिए कि “अगर हमारे बीच का कोई व्यक्ति आगे बढ़ रहा है, तो उसकी सफलता पूरे community के लिए inspiration और opportunity बन सकती है।” Departmental Store वाला व्यक्ति सफल होता है तो मोहल्ले में employment और बेहतर services पैदा हो सकती हैं। कोई व्यक्ति public life में आगे बढ़ता है तो वह अपने क्षेत्र की समस्याओं को बड़े मंच तक पहुंचा सकता है। अर्थात किसी एक व्यक्ति की progress को केवल व्यक्तिगत लाभ के रूप में देखने के बजाय collective growth के नजरिए से भी देखा जा सकता है।
“किसी परिचित व्यक्ति को ऊपर उठते देखकर उसे नीचे खींचने से हमारी स्थिति ऊपर नहीं होती; लेकिन उसकी सफलता से सीखकर स्वयं आगे बढ़ने की कोशिश करें तो पूरा समाज ऊपर उठ सकता है।”